भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य

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शिक्षा और स्वास्थ्य

भारत में मंहगी होती शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाए बहुत ही चिंता का विषय है। सरकार को चाहिए की शिक्षा के व्यापारीकरण पर अंकुश लगाने के लिए नियामक आयोग को प्रभावी और बनाया जाये। सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा सामान्य आदमी के आसनी से पहुँच में होना चाहिए.

हम सब जानते हैं कि निजीकरण की प्रक्रिया के बाद शिक्षा मंहगी हुई है। सरकार से शिक्षा का बजट कम मिल रहा है। निजी संस्थाओं का व्यवसायीकरण के उद्देश्य से इस क्षेत्र में आना बहुत ही चिंता का विषय है। आज प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा का व्यापारीकरण होता जा तहा है। इसके चलते सामान्य घर से आने वाले छात्रों के लिए शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो गया है। मंहगी होती शिक्षा से अभिभावक भी प्रभावित हो रहे हैं। शुल्क निर्धारण और सुविधाओं का मापदंड तय करने के लिए नियामक आयोग को और अधिक शक्तियां देकर इसे अतिशीघ्र प्रभावी बनाया जाना चाहिए. आवश्यकता पड़ने पर सरकार भौगोलिक या संख्या के आधार पर आयोग का विकेन्द्रीकरण करें। शिक्षा को व्यापक बनाने के लिए धार्मिक, सामाजिक एवं उद्योग समूहों से आगे आना चाहिए. देशपांडे ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा तो अत्यन्त ही महंगी हो गई है, डिग्री पूरी करते ही चिकित्सक डिग्री में लगा पैसा निजी व्यवसाय द्वारा सामान्य व्यक्ति से वसूलना प्रारंभ कर देता है।

कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं अनुपलब्ध है, जहां है वहाँ भी बहुत महंगी है। जो सामान्य व्यक्ति की पहुंच के बाहर है। स्वास्थ्य सेवाएं सहज और सबको सस्ती उपलब्ध हो। सरकार जेनेरिक औषधियों को प्रोत्साहन दे ताकि सभी को सस्ती दवाईयां मिले। केन्द्र सरकार द्वारा हाल के बजट में 3000 जेनेरिक औषधि केन्द्र खोलना स्वागत योग्य कदम है किन्तु इनका प्रभावी क्रियान्वयन हो। आयुर्वेदिक, यूनानी व अन्य पद्धतियों की औषधियों का प्रमापीकरण व उनके परीक्षण की विधियों का विकास भी किया जाना चाहिए. समाज को भी रोगमुक्त रहने के लिए दिनचर्या, कुपोषण व नशामुक्ति के लिए जनजागरण का प्रयास करना चाहिए.

आज भी आमजन के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भेदभाव जारी है। देश के गरीब, मजदूर और किसान के बच्चे सरकारी स्कूलों की शिक्षा पद्धति पर निर्भर है, और सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बात की जाए स्वास्थ्य की तो वहाँ भी स्थिति ठीक नहीं हैं। गरीब, किसान और मजदूर के परिजनों को बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। जिसकी वजह से कई बार तो उनकी मौत तक हो जाती है। मोदी जी इस विषय पर भी आपको हर हाल में ध्यान देना ही पड़ेगा, क्यों कि देश की जनता आज आपकी तरफ आशा भरी निगाहों से देख रही है, जनता को यह विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत देश विश्व का सबसे मजबूत देश बनकर उभर रहा है, और आगे भी आप इस विश्वास को कायम रखेंगे।

यदि स्कूल शिक्षा प्रणाली में एक समान शिक्षा पद्धति को लागू कर दिया जाए, तो एक बहुत बड़ा वर्ग भेद अपने आप ही मिट जाएगा। देश के सरकारी स्कूलों के साथ सभी निजी स्कूलों में एक जैसा स्लेबस और एक जैसी युनिफार्म लागू कर दी जाए, तो शिक्षा में सुधार तो होगा ही साथ ही सभी में समानता का भाव भी रहेगा। राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परषिद् (एन.सी.ई.आर.टी.) का स्लेबस पूरे देश में सबसे अच्छा माना जाता है, यदि इसके अलावा अन्य कोई स्लेबस जिसे आप भारतीय संस्कृति और राष्ट्र हित में समझते हैं तो उसे भी लागू किया जा सकता है।

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